नई दिल्ली: बांग्लादेश में बीते साल जुलाई में छात्रों द्वारा नौकरियों में कोटा सिस्टम के खिलाफ बड़े आंदोलन किया गया था , जिसमें शेख हसीना की सरकार को अगस्त में उखाड़ फेंका गया था। इस आंदोलन में कई प्रदर्शनकारियों की जान गई थी। शेख हसीना को देश छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी थी। अब छह महीने बाद बेरोजगारी की स्थिति और खराब हो गई है और कई लोग मानते हैं कि आजकल नौकरी पाना भी गोलियो खाने से ज्यादा कठिन हो गया है।
पिछले साल की मुख्य वजह बेरोजगारी ही थी, जिसने विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया। अगस्त क्रांति के बाद बेरोजगारी की स्थिति और भी खराब हो गई है। ढाका विश्वविद्यालय के छात्र मोहम्मद रिजवान चौधरी ने बताया कि अब तक सरकार की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। वह कहते हैं कि युवाओं के लिए बहुत कम प्रयास किए गए हैं, और इस निराशा के कारण छात्रों के सपने टूटने लगे हैं।
बांग्लादेश सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार, सितंबर 2024 तक बेरोजगारों की संख्या 26.6 लाख हो गई थी, जो पिछले साल 24.9 लाख थी। इस दौरान, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी बांग्लादेश की आर्थिक हालत पर चिंता व्यक्त की थी। मुद्रास्फीति की दर भी उच्च बनी हुई है और टैक्स से होने वाली आय में कमी आई है। खर्च का दबाव भी बढ़ा है। कुछ लोग अब शेख हसीना के सरकार के जाने के बाद की स्थिति को उम्मीद से अलग और निराशाजनक देख रहे हैं। चौधरी का कहना है कि यूनुस सरकार ने छात्र नेताओं को मंत्री पद तो दिए हैं, लेकिन छात्रों की असल मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।