नई दिल्ली: इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने व्हाइट हाउस पहुंचे. इस दौरान दोनों नेताओं के बीच काफी देर तक बातचीत हुई. इस साल 20 जनवरी को कार्यालय लौटने के बाद ट्रंप की किसी विदेशी नेता के साथ यह पहली मुलाकात थी. मुलाकात के बाद दोनों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हम चाहते हैं कि अमेरिका गाजा पट्टी का ओनरशिप ले और इसका विकास करे. उन्होंने कहा कि अमेरिका युद्धग्रस्त फिलिस्तीनी क्षेत्र गाजा पट्टी पर कब्जा करेगा और उसका विकास करेगा. इसका मालिकाना हक भी बरकरार रहेगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि हम गाजा में खतरनाक गैर-विस्फोटक बमों और अन्य हथियारों का इस्तेमाल बंद कर देंगे. नष्ट हुई इमारतों का पुनर्निर्माण करेंगे और एक आर्थिक विकास करेंगे जो क्षेत्र के लोगों के लिए असीमित संख्या में नौकरियां और आवास प्रदान करेगा. उन्होंने आगे कहा कि मुझे उम्मीद है कि यह युद्धविराम और शांति की शुरुआत हो सकती है. ट्रंप ने कहा कि मेरा प्रशासन गठबंधन में विश्वास बहाल करने और पूरे क्षेत्र में अमेरिकी ताकत का पुनर्निर्माण करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है.
डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा की मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि संयुक्त राज्य अमेरिका यहूदी-विरोधी संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से हट गया और संयुक्त राष्ट्र राहत और कार्य एजेंसी के लिए सभी समर्थन समाप्त कर दिया, संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने हमास को वित्त पोषित किया और यह मानवता के प्रति बहुत विश्वासघाती था. मैंने ईरानी शासन पर अधिकतम दबाव की हमारी नीति को बहाल करने के लिए भी कार्रवाई की.
ट्रंप ने कहा, “हम एक बार फिर सबसे आक्रामक प्रतिबंध लगाएंगे, ईरानी तेल निर्यात को शून्य कर देंगे और पूरे क्षेत्र और दुनिया भर में आतंकवाद को वित्तपोषित करने की शासन की क्षमता को कम कर देंगे.” नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति की तारीफ की और ट्रंप को इजराइल का अब तक का सबसे बड़ा दोस्त बताया. उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति की गाजा योजना “इतिहास बदल सकती है” और “ध्यान देने योग्य” है.
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