लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को प्रयागराज में साल 2021 के बुलडोजर एक्शन पर नाराजगी जताई है। SC ने प्रयागराज ऑथोरिटी को सभी 5 याचिकाकर्ताओं को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने इस एक्शन को अमानवीय और अवैध बताया। कहा कि कार्रवाई के दौरान दूसरों की भावनाओं का ख्याल नहीं रखा गया। इसने हमारी अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है।
सरकार के लिए सबक जरूरी
जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जवल भुइयां की बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा कि लोगों के रिहायशी घरों को इस तरह से नहीं गिराया जा सकता है। नोटिस मिलने के 24 घंटे के भीतर मकान गिरा देना अवैध है। बेंच ने कहा कि यह मुआवज़ा इसलिए भी ज़रूरी है ताकि भविष्य में सरकारें बिना उचित प्रक्रिया के लोगों के घर तोड़ने से बचें। न्यायाधीशों ने हाल ही में सामने आए एक वीडियो का भी हवाला दिया, जिसमें एक लड़की गिरती हुई झोपड़ी से अपनी किताबें लेकर भाग रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं हर जगह अलग-अलग रूपों में देखने को मिल रही हैं।
अत्याचार नहीं कर सकते
जब इस मामले की पहली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हुई थी, उस समय पीड़ितों की ओर से वकील अभिमन्यु भंडारी ने दलील दी थी। उन्होंने कहा था कि अतीक अहमद नाम का एक गैंगस्टर था, जिसकी 2023 में हत्या कर दी गई थी। अधिकारियों ने पीड़ितों की जमीन को अतीक की जमीन समझ लिया। उन्हें अपनी गलती माननी चाहिए। इस दलील पर यूपी सरकार ने कहा था कि हमने याचिकाकर्ताओं को नोटिस का जवाब देने के लिए पर्याप्त समय दिया था। जस्टिस ओका इस दलील से सहमत नहीं हुए। उन्होंने फटकार लगाते हुए कहा कि नोटिस इस तरह क्यों चिपकाया गया? कोई भी इस तरह नोटिस देगा और तोड़फोड़ करेगा? यह तो अत्याचार है।