पटना: नवरात्रि और ईद-उल-फितर के दौरान कुछ स्थानों पर मांस बिक्री पर प्रशासनिक प्रतिबंध के बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इसे “विभाजनकारी राजनीति” करार देते हुए कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि धर्म को राजनीति से जोड़ना पूरी तरह बेकार है और राजनीतिक दलों को किसी की आस्था पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए।

एनडीए की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख पासवान ने कहा, “लोग अपनी राजनीति चमकाने के लिए समाज में फूट डालने की कोशिश करते हैं। आज देश के सामने कई बड़े मुद्दे हैं, जिन पर चर्चा होनी चाहिए। लेकिन, राजनीतिक दलों को धर्म के मामलों में दखल नहीं देना चाहिए। यह व्यक्तिगत आस्था का विषय है।”

‘नवरात्रि में मांस बिक्री पर प्रतिबंध बेकार की बहस’

मांस की दुकानों पर रोक को लेकर चल रही बहस को पासवान ने “बेवजह का विवाद” बताते हुए कहा कि सदियों से सभी धर्मों के लोग भाईचारे के साथ रहते आए हैं। उन्होंने कहा, “यह सब फालतू की बातें हैं। कौन नमाज पढ़ेगा और कहां, नवरात्रि में दुकानें खुली रहेंगी या बंद – इस पर चर्चा की कोई जरूरत नहीं है।”
चिराग पासवान ने आगे कहा कि यदि धार्मिक संगठन राजनीति से दूर रहें और राजनेता आस्था के मामलों में हस्तक्षेप न करें, तो 90% विवाद खत्म हो जाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा, “समस्या तब होती है जब राजनीति धर्म में दखल देती है और विवाद खड़ा होता है।”

मैहर में नवरात्रि में मांस बिक्री पर बैन

इससे पहले, मध्य प्रदेश के मैहर में प्रशासन ने 30 मार्च से 7 अप्रैल तक मांस, मछली और अंडे की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था। सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) विकास कुमार सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किया, जो संभावित खतरे को रोकने के लिए तत्काल निवारक आदेश की अनुमति देता है।
अब यह बहस छिड़ गई है कि क्या प्रशासन को धार्मिक आयोजनों के दौरान इस तरह के प्रतिबंध लगाने चाहिए या नहीं।

 

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