हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के राजगढ़ क्षेत्र में एक अंतरजातीय विवाह को लेकर भारी हंगामा हुआ। एक ब्राह्मण युवती के अनुसूचित जाति के युवक से विवाह करने के बाद स्थानीय लोगों ने थाने का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया। स्थिति को संभालने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा।

क्या है पूरा मामला?

राजगढ़ के टिक्कर गांव की एक युवती 26 मार्च को कोचिंग सेंटर जाने के लिए घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। परिजनों को जानकारी मिली कि उसने एक युवक से विवाह कर लिया है और नाहन में रह रही है। इसके बाद परिवार ने राजगढ़ थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई।

शुक्रवार को जब युवती के परिजन थाने पहुंचे, तो वहां भारी हंगामा हुआ। देवभूमि क्षत्रिय संगठन सवर्ण मोर्चा के अध्यक्ष रूमित ठाकुर और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी वहां पहुंचे और धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान पुलिस अधिकारी रविंद्र सिंह ने बताया कि युवती ने अपनी मर्जी से विवाह किया है और विवाह प्रमाण पत्र भी पुलिस को सौंपा है। साथ ही, युवती ने नाहन थाने में एक आवेदन भी दिया है, जिसमें उसने परिवार से अपनी जान को खतरा बताया है।

थाने में गरमाया माहौल

रूमित ठाकुर ने पुलिस पर विवाह प्रमाण पत्र को फर्जी बताने का आरोप लगाया और युवती को परिजनों के सामने पेश करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि युवती पिता के सामने विवाह को स्वीकार कर लेती है, तो वे बिना किसी विरोध के वापस चले जाएंगे। उनका सवाल था कि युवती को अपने पिता से खतरा कैसे हो सकता है।

पिता की तबीयत बिगड़ी

धरना प्रदर्शन और बहसबाजी के बीच युवती के पिता थाने में ही बेहोश हो गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया। स्थिति बिगड़ती देख नाहन से अतिरिक्त पुलिस बल और क्यूआरटी को तैनात किया गया। रूमित ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा अंतरजातीय विवाह पर दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की योजना के कारण युवक ने युवती को भगाया है। उन्होंने दावा किया कि युवती की मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं है। हालांकि, पुलिस ने युवती को थाने में लाने से इनकार कर दिया, क्योंकि वह बालिग है और अपनी मर्जी से विवाह कर चुकी है।

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