नई दिल्ली: चैत्र नवरात्रि का आज तीसरा दिन है, जो मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है। यह दिन साहस, आत्मविश्वास और निर्भयता पाने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन माता की उपासना से भय और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। इसके साथ ही व्यक्ति को जीवन में शक्ति और धैर्य की प्राप्ति होती है।
मां चंद्रघंटा के मस्तक पर अर्धचंद्र विराजमान होता है, जिससे इन्हें यह नाम मिला है। इनके दस हाथों में अस्त्र-शस्त्र हैं और मुद्रा युद्ध के लिए तत्पर योद्धा जैसी होती है। ऐसा कहा जाता है कि इनकी पूजा करने से व्यक्ति शक्तिशाली और आत्मनिर्भर बनता है। ज्योतिष में माता का संबंध मंगल ग्रह से जोड़ा जाता है, इसलिए जिन जातकों की कुंडली में मंगल कमजोर होता है, उन लोगों को मां चंद्रघंटा की पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है।
मां चंद्रघंटा को दूध और दूध से बनी मिठाई का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही पूजा के दौरान लाल वस्त्र धारण करना और माता को लाल फूल, रक्त चंदन और लाल चुनरी चढ़ाना शुभ माना जाता है। इस दिन मणिपुर चक्र को सक्रिय करने के लिए ‘रं’ बीज मंत्र का जाप करना लाभकारी होता है।
अगर किसी जातक की कुंडली में मंगल दोष है, तो मां चंद्रघंटा की पूजा करना अत्यंत लाभकारी साबित होता है। पूजा में लाल फूल, तांबे का सिक्का या तांबे की वस्तु चढ़ाने से विशेष फल मिलता है। इसके साथ ही “ॐ अं अंगारकाय नमः” मंत्र का जाप करना मंगल दोष से मुक्ति दिला सकता है और आपके सभी कष्टों को दूर रता है। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर मां चंद्रघंटा की उपासना से व्यक्ति जीवन में निडर और शक्तिशाली महसूस करते हैं।
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