महाभारत में बर्बरीक को क्यों दिया था श्रीकृष्ण ने विजय का श्रेय, जानिए इसके पीछे का रहस्य

नई दिल्ली: महाभारत का युद्ध एक ऐतिहासिक और पौराणिक घटना है, जिसमें पांडवों ने कौरवों पर विजय प्राप्त की थी। हालांकि, इस युद्ध में एक ऐसा योद्धा था, जिसे युद्ध का साक्षी कहा जाता है – बर्बरीक। श्रीकृष्ण ने महाभारत की विजय का श्रेय पांडवों को नहीं, बल्कि बर्बरीक को दिया, जो एक गहरे संदेश […]

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महाभारत में बर्बरीक को क्यों दिया था श्रीकृष्ण ने विजय का श्रेय, जानिए इसके पीछे का रहस्य

Shweta Rajput

  • October 16, 2024 2:34 pm Asia/KolkataIST, Updated 1 month ago

नई दिल्ली: महाभारत का युद्ध एक ऐतिहासिक और पौराणिक घटना है, जिसमें पांडवों ने कौरवों पर विजय प्राप्त की थी। हालांकि, इस युद्ध में एक ऐसा योद्धा था, जिसे युद्ध का साक्षी कहा जाता है – बर्बरीक। श्रीकृष्ण ने महाभारत की विजय का श्रेय पांडवों को नहीं, बल्कि बर्बरीक को दिया, जो एक गहरे संदेश से भरी पौराणिक कथा का हिस्सा है।

 

बर्बरीक की कथा

 

बर्बरीक महाबली भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र थे। उन्हें भगवान शिव से तीन अमोघ बाणों का वरदान प्राप्त था, जिनसे वह अकेले ही पूरे युद्ध का नतीजा पलट सकते थे। बर्बरीक की प्रतिज्ञा थी कि वह हमेशा युद्ध में कमजोर पक्ष का समर्थन करेंगे। जब महाभारत का युद्ध छिड़ा, तो बर्बरीक युद्धक्षेत्र में जाने के लिए तैयार हुए।

श्रीकृष्ण ने उनकी प्रतिज्ञा और शक्ति को देखते हुए उनसे पूछा कि वह किसका पक्ष लेंगे। बर्बरीक ने कहा कि वह कमजोर पक्ष का साथ देंगे। श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया कि उनके युद्ध में शामिल होते ही स्थिति लगातार बदलती रहेगी और अंत में वह केवल अकेले ही रह जाएंगे, क्योंकि उनके बाणों से दोनों पक्ष हार जाएंगे। इसके बाद श्रीकृष्ण ने उनसे उनका सिर मांग लिया, ताकि वे युद्ध में शामिल न हो सकें, लेकिन बर्बरीक ने इच्छा जाहिर की कि उनका सिर युद्ध को देख सके। श्रीकृष्ण ने उनकी यह इच्छा पूरी की और उनका सिर एक ऊंचे स्थान पर रख दिया गया, जिससे वह पूरे युद्ध को देख सके।

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बर्बरीक को जीत का श्रेय क्यों?

 

महाभारत के युद्ध के अंत में, जब पांडवों ने विजय प्राप्त की, तो युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से पूछा कि इस युद्ध में वास्तविक विजेता कौन था? श्रीकृष्ण ने उन्हें बर्बरीक का नाम सुझाया, क्योंकि उन्होंने पूरे युद्ध को निष्पक्ष दृष्टि से देखा था। बर्बरीक ने कहा कि उन्होंने केवल श्रीकृष्ण को हर ओर युद्ध करते हुए देखा। यह सुनकर श्रीकृष्ण ने कहा कि असल में युद्ध का वास्तविक श्रेय उनकी दिव्य लीला और परमशक्ति को जाता है।

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