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मौनी अमावस्या पर शाही स्नान का क्या है महत्त्व, जानें शुभ मुहूर्त का समय

हिंदू पंचांग के अनुसार, आज यानी 29 जनवरी को मौनी अमावस्या है। इस दिन स्नान, दान और मौन व्रत का विशेष महत्व होता है। मौनी अमावस्या को आत्मचिंतन और मौन व्रत का दिन माना जाता है। इस दिन पितरों का तर्पण करने से उनके आशीर्वाद की प्राप्ति होती है.

Mauni Amavasya, mahakumbh 2025
  • January 29, 2025 10:09 am Asia/KolkataIST, Updated 4 weeks ago

नई दिल्ली: हिंदू पंचांग के अनुसार, आज यानी 29 जनवरी को मौनी अमावस्या है। इस दिन स्नान, दान और मौन व्रत का विशेष महत्व होता है। श्रद्धालु अगर-अगल तीर्थस्थलों पर पवित्र नदी में स्नान कर पुण्य अर्जित करते हैं। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदी में डुबकी लगाने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और आत्मा शुद्ध होती है। आइए इसी बीच जानते है कि मौनी अमावस्या है कि मौनी अमावस्या का क्या महत्त्व है और पूजा का क्या है शुभ मुहूर्त?

मौनी अमावस्या का महत्व

मौनी अमावस्या को आत्मचिंतन और मौन व्रत का दिन माना जाता है। इस दिन पितरों का तर्पण करने से उनके आशीर्वाद की प्राप्ति होती है और कुंडली में मौजूद दोषों से मुक्ति मिलती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मौन व्रत रखने से वाणी पर नियंत्रण बढ़ता है और व्यक्ति को वाक् सिद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान शिव और सूर्यदेव की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

महाकुंभ में शाही स्नान

मौनी अमावस्या के दिन महाकुंभ में दूसरा शाही स्नान भी आयोजित गया है. इस दौरान साधु-संतों और श्रद्धालुओं का गंगा में डुबकी लगाने का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष ग्रहों की अनुकूल स्थिति के कारण इस दिन का महत्व और बढ़ गया है। बता दें चंद्रमा, सूर्य और बुध मकर राशि में त्रिवेणी योग बना रहे हैं, जिसे बेहद शुभ माना जा रहा है।

शाही स्नान का शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:25 06:18 बजे तक है
गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:15 बजे से 6:15 बजे तक है

मौनी अमावस्या पर क्या करें?

  • सूर्योदय से पहले गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें।
  • घर पर स्नान करते समय जल में गंगाजल मिलाएं और “ऊँ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
  • सूर्यदेव को तांबे के लोटे में जल, लाल पुष्प, गेहूं और काले तिल डालकर अर्घ्य दें।
  • तिल, अन्न, वस्त्र और दक्षिणा का दान करें, जिससे मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
  • कालसर्प दोष निवारण के लिए शिवलिंग पर जलाभिषेक करें और नाग-नागिन का पूजन कर प्रवाहित करें।
  • शाम को पीपल के पेड़ के नीचे दीप जलाएं और पितरों के लिए तर्पण करें।

मान्यता है कि मौनी अमावस्या पर किए गए दान-पुण्य और पूजा से न केवल पितरों की आत्मा को शांति मिलती है, बल्कि व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता और समृद्धि आती है।

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