नई दिल्ली: आज चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना की जा रही है। मां ब्रह्मचारिणी को ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी कहा जाता है। मान्यता के अनुसार, मां कठोर साधना और ब्रह्म देव की भक्ति में मग्न रहने के कारण मां ब्रह्मचारिणी के रूप में पूजी जाती है। कहा जाता है कि जिनका चंद्रमा कमजोर है, उन लोगों को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करनी चाहिए। इससे उन्हें विशेष लाभ मिलता है। आइए जानते हैं पूजा की विधि के बारे में:
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से पहले पीले या सफेद वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही पूजा के दौरान मां को सफेद वस्तुएं जैसे मिसरी, शक्कर और पंचामृत अर्पित करने की परंपरा है। वहीं मां की पूजा-अर्चना करते समय “ऊं ऐं नमः” मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है,साथ ही यह घर में सुख-शांति लेकर आता है।
मां ब्रह्मचारिणी को नवरात्र के दूसरे दिन शक्कर का भोग लगाया जाता है। भोग चढ़ाने के बाद इसे घर के सभी सदस्यों में बांटने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
कथाओं के अनुसार, देवी पार्वती ने ब्रह्मचारिणी रूप में जन्म लिया था और भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। हजारों वर्षों तक उन्होंने फल, फूल और बिल्व पत्र खाकर तपस्या की। इसके बाद, उन्होंने अन्न और जल का भी त्याग कर दिया, जिससे उनका एक नाम ‘अर्पणा’ भी पड़ा। उनकी घोर तपस्या से भगवान शिव प्रसन्न हुए और पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार किया।