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जेलेंस्की ना घर के रहे ना घाट के! जिस लालच में पुतिन से लड़ रहे जंग, अब ट्रंप नहीं देंगे वो चीज

सैन्य शक्ति में रूस से बेहद कमजोर यूक्रेन पिछले तीन सालों से अमेरिका और नाटो देशों की मदद से जंग लड़ रहा है। लेकिन 20 जनवरी 2025 को यूक्रेन को बड़ा झटका लगा। इस युद्ध में यूक्रेन की सबसे ज्यादा मदद करने वाले अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली। प्रेसिडेंट बनते ही ट्रंप ने यूक्रेन पर दबाव डालना शुरू कर दिया कि वो युद्ध से पीछे हट जाए।

Zelensky-Putin-Trump
inkhbar News
  • March 31, 2025 12:54 pm Asia/KolkataIST, Updated 3 days ago

Russia–Ukraine War: 24 फरवरी 2022, इस दिन शुरू हुआ रूस-यूक्रेन युद्ध अभी तक जारी है। इस जंग में दोनों देश अब तक हजारों सैनिकों की जान गंवा चुके हैं। युद्ध का सबसे ज्यादा नुकसान यूक्रेन झेल रहा है। उसके एक बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र पर रूसी सेना कब्जा कर चुकी है और कई बड़े शहर रूसी हमले में पूरी तरह से बर्बाद हो चुके हैं।

सैन्य शक्ति में रूस से बेहद कमजोर यूक्रेन पिछले तीन सालों से अमेरिका और नाटो देशों की मदद से जंग लड़ रहा है। लेकिन 20 जनवरी 2025 को यूक्रेन को बड़ा झटका लगा। इस युद्ध में यूक्रेन की सबसे ज्यादा मदद करने वाले अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली। प्रेसिडेंट बनते ही ट्रंप ने यूक्रेन पर दबाव डालना शुरू कर दिया कि वो युद्ध से पीछे हट जाए।

क्या चाहते हैं ट्रंप?

डोनाल्ड ट्रंप यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य सहायता लगभग-लगभग रोक चुके हैं। ट्रंप चाहते हैं कि यूक्रेन उन्हें आर्थिक मदद के बदले अपने दुर्लभ खनिज दे। अमेरिका और यूक्रेन के बीच इन मिनरल्स को लेकर एक डील भी हुई है। लेकिन अब ट्रंप का कहना है कि जेलेंस्की इस डील से पीछे हटने की कोशिश कर रहे हैं।

ट्रंप ने साफ कह दिया है कि अगर जेलेंस्की इस डील से पीछे हटते हैं तो फिर उनके सामने समस्या खड़ी हो जाएगी। इस दौरान उन्होंने बड़ा बयान देते हुए कहा कि यूक्रेन कभी भी नाटो का सदस्य नहीं बनेगा।

बुरे फंसे जेलेंस्की

डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान के बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की बुरी तरह से फंसते हुए नजर आ रहे हैं। एक ओर रूस से जंग में उनका पूरा देश तबाह हो चुका है। यूक्रेन के आर्थिक हालात बदतर हैं। देश को फिर से पटरी पर लाने के लिए सैंकड़ों अरब डॉलर की जरूरत होगी, जो अभी किसी देश से मिल पाना असंभव नजर आ रहा है।

वहीं, जिस नाटो सुरक्षा की लालच में जेलेंस्की ने पुतिन से युद्ध मोल लिया था वो सुरक्षा भी अब मिलती हुई नहीं नजर आ रही हैं। बता दें कि रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरूआत ही इसी मुद्दे पर हुई थी कि जेलेंस्की अपने देश को नाटो का सदस्य बनाना चाहते थे, लेकिन पुतिन को ये मंजूर नहीं था। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन नहीं चाहते थे कि उनके पड़ोस में नाटो सेनाओं का ठिकाना बने।

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