Sajid Rashidi on Shivaji Maharaj : मुस्लिम धर्मगुरु और अखिल भारतीय इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने छत्रपति शिवाजी महाराज और हिंदू धर्म को लेकर दिए गए अपने एक बयान से नया विवाद खड़ा कर दिया है. उनके इस बयान ने न केवल राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचाई है बल्कि सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस को जन्म दिया है. हिंदू संगठनों ने इसे आपत्तिजनक करार देते हुए कड़ा विरोध जताया है.

शिवाजी महाराज पर विवादास्पद टिप्पणी

मौलाना रशीदी ने छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर कहा ‘उनकी मराठाओं के लिए कोई बड़ी उपलब्धि नहीं थी और वे भी एक सामान्य राजा थे.’ इतिहास के संदर्भ में उन्होंने आगे कहा ‘लोग औरंगजेब को गाली देते हैं, लेकिन इतिहास की सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता.’ इस बयान ने शिवाजी महाराज के प्रशंसकों और इतिहास प्रेमियों में आक्रोश पैदा कर दिया है जो उन्हें भारत के सबसे कुशल रणनीतिकारों और शासकों में से एक मानते हैं.

हिंदू धर्म पर उठाए सवाल

रशीदी ने हिंदू धर्म की मूल प्रकृति पर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा ‘आपमें एक बड़ी कमी है कि आप लोगों को यह नहीं बता सकते कि हिंदू धर्म क्या है. यह सनातन है या हिंदू धर्म या कुछ भी नहीं. वैदिक धर्म में मूर्ति पूजा नहीं होती थी. यह प्रथा 150-200 साल में आई है. आप मुझे बता दीजिए कि राम किसे पूजते थे? कृष्ण किसे पूजते थे?’ उनकी यह बात हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए आश्चर्यजनक और विवादास्पद रही.

हिंदू विवाह पद्धति पर कटाक्ष

हिंदू शादियों को लेकर भी रशीदी ने तंज कसा. उन्होंने कहा ‘आज शादियों में कहा जाता है कि 36 गुण मिलने चाहिए. लेकिन ये गुण पंडित मिलाते हैं और फिर एक महीने में तलाक हो जाता है. पंडित ने हिंदू धर्म के साथ खिलवाड़ किया है.’ इस बयान ने हिंदू विवाह परंपराओं को निशाना बनाकर एक नई बहस छेड़ दी है.

राजाओं पर भी दिया बयान

मौलाना ने राजाओं के योगदान को भी कमतर आंकते हुए कहा ‘ऐसे ही राजाओं पर मत जाइए. उन्होंने न हिंदुओं के लिए कुछ किया और न ही मुसलमानों के लिए. वे सिर्फ अपनी सत्ता के लिए लड़े.’ यह दावा ऐतिहासिक तथ्यों और शिवाजी महाराज जैसे शासकों की विरासत के खिलाफ माना जा रहा है.

सोशल मीडिया पर भारी विरोध

रशीदी के बयानों के बाद हिंदू संगठनों ने इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया. उनका कहना है कि शिवाजी महाराज ने न केवल मराठा साम्राज्य की नींव रखी बल्कि अपनी रणनीतियों और शासन से पूरे भारत को प्रेरित किया. सोशल मीडिया पर लोग इसे इतिहास का अपमान बता रहे हैं. एक यूजर ने लिखा ‘शिवाजी महाराज हमारे गौरव हैं उनकी तुलना सामान्य राजा से करना शर्मनाक है.’ वहीं कुछ ने इसे धार्मिक एकता को तोड़ने की साजिश करार दिया.

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