देश-प्रदेश

अमेरिका से आगे थीं भारत की महिलाएं, जाने WOMEN’S DAY पर पूरी कहानी

नई दिल्ली : समाज में महिलाएं दिन-प्रतिदिन अपना प्रभाव छोड़ रही है. बहुत सारे ऐसे काम है जो आज तक पुरूष नहीं कर पाए है वे महिलाओं ने कर दिखाया. समाज में अपना सम्मान बनाए रखने के लिए महिलाओं को काफी संघर्ष करना पड़ रहा है. लेकिन धीरे-धीरे उनकी स्थिति सुधरी है. 18वीं शताब्दी के बाद महिलाओं के जीवन में काफी सुधार हुआ है. आज के सभी विकसित राष्ट्र जब आजाद हुए थे तो उनके यहां महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं था. लेकिन भारत में आजादी के समय से ही महिलाओं को वोट देने का अधिकार है.

इस दिन मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस

पूरे विश्व में 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है. इस दिन महिलाओं की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक उपलब्धियों का सम्मान करने का उत्सव मनाया जाता है. यह दिन महिलाओं के अधिकार, समानता, महिलाओं के खिलाफ हिंसा और प्रजनन अधिकारों जैसे जरूरी विषयों पर केंद्रित है.

इस साल हुआ था मजदूर आंदोलन

विकसित राष्ट्रों में शुमार अमेरिका में 1908 में मजदूर आंदोलन हुआ था. इस आंदोलन में बहुत सारी महिलाओं ने हिस्सा लिया था. ये महिलाएं न्यूयॉर्क की सड़क पर उतर कर अपने अधिकार की मांग कर रही थीं. महिलाओं की मांग थी कि उनके काम करने के घंटे कम किए जाए और उनका वेतन बढ़ाए जाए. इसी आंदोलन में महिलाओं को मताधिकार देने का भी मुद्दा उठा था. आंदोलन इतना विकराल हो गया कि तब जाकर वहां की सरकार के कान तक आवाज पहुंची. इसी आंदोलन का नतीजा है कि आंदोलन के एक साल बाद यानी 1909 में अमेरिका की सोशलिस्ट पार्टी ने महिला दिवस मनाने का ऐलान किया. पहली बार महिला दिवस अमेरिका के न्यूयॉर्क में 28 फरवरी 1909 में मनाया गया था.

8 मार्च को क्यों चुना गया

महिलाओं को काफी लंबी लड़ाई लड़ने के बाद अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी महिला सम्मेलन अगस्त 1910 में स्थापित किया गया था. पहली बार जर्मनी में 8 मार्च 1914 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया. संयु्क्त राष्ट्र ने 1975 से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को चिन्हित करना शुरू कर दिया था उसके बाद 1977 में निर्णय लिया कि हर साल 8 मार्च के दिन अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाएगा.

महिलाओं के लिए उपलब्धि का दिन

पूरे दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस विशेष रूप से महिलाओं की उपलब्धियों का जश्न मनाता है. पूरे विश्व में लैंगिक असमानता के बारे में जागरूकता बढ़ाता है. इस दिन हमें महिलाओं के अधिकारों के बारे में चर्चा करनी चाहिए.

2023 के अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की थीम ‘डिजिटऑल लैंगिक समानता के लिए प्रौद्योगिकी और नवाचार’ है. इस बार जो भी कार्यक्रम होंगे इसी थीम पर आधारित होंगे.

Vivek Kumar Roy

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