नई दिल्ली. सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को वापस ले लिया है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज इन कानूनों की वापसी की घोषणा की. आज गुरुनानक जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह ऐलान किया है. इस फैसले को चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है, कुछ लोगों का कहना है कि अगले साल होने वाले पांच राज्यों के चुनाव को देखते हुए यह फैसला लिया गया है, तो वहीं कुछ लोगों का कहना है कि किसानों की जीत ( Social media reactions on farm laws repulsion ) हुई है.
कृषि कानूनों की वापसी पर सोशल मीडिया पर लोगों ने मिलीजुली प्रतिक्रियाएं दी हैं, कई लोगों ने इस कानून की वापसी पर सरकार की तारीफ की है. तो वहीं, कुछ ने इसे वोट बैंक की राजनीति बताई है. लोगों का कहना है कि सरकार किसानों से डर गई है, इसलिए इस क़ानून को वापस लिया गया है. कुछ लोगों का ये भी कहना है कि आज गुरु पर्व के मौके पर सरकार ने इसलिए ये क़ानून वापस लिए हैं जिससे किसानों का वोट अब भाजपा के पक्ष में हो.
ट्विटर पर एक यूज़र ने कृषि कानूनों की वापसी पर कहा कि,
“यह निर्णय बिल्कुल गलत है इस बिल से लाखों किसानों की आंकाक्षा जुड़ी हुई और कुछ बिचोलियों के दवाब में आकर कृषि कानून वापस लेना ठीक नहीं है, वहीं एक यूजर राकेश टिकैत पर हमला करते हुए कहा कि कृषि कानून तो कभी मुद्दा था ही नहीं तो आंदोलन कृषि कानूनों के वापसी पर कैसे खत्म हो सकता है.”
वहीं एक अन्य यूज़र ने लिखा,
‘तीनो काले कानून वापस होने पर
अंध भक्त ऐसे खुश हो रहे हैं
जैसे काले कानून राहुल गांधी लाये थे’
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