होम्योपैथिक दवाओं से अक्सर ऐसी बीमारियों का इलाज हो जाता है जिससे मरीज बड़े- बड़े विशेषज्ञों के पास जाकर भी हार मान चुका होता है.
नई दिल्ली. आम तौर पर कई लोग बीमारी को बड़ा होता देखकर अंग्रेजी डॉक्टर और दवाओं का रुख कर लेते हैं लेकिन अक्सर ही ऐसा देखने को मिलता है कि इसकी तुलना में होम्योपैथिक दवाएं कई लाइलाज बीमारियों का इलाज कर देती हैं. कई बार इलाज लंबा जरूर चलता है लेकिन बीमारी पूरी तरह खत्म हो जाती है. दिल्ली के मयूर विहार के होम्योपैथिक डॉक्टर वीएन शर्मा का दावा है कि 15 सालों से डाइबटीज मेलाइटिस से पीड़ित ए वी खान को डायबटिक फुट हो गया था. उन्होंने कई प्रतिष्ठत डॉक्टरों से अपना इलाज करवाया लेकिन उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ. यहां तक कि उन्हें जान बचाने के लिए पैर काटने को भी कहा गया. लेकिन डॉक्टर वीएन शर्मा के पास जब से मामला आया तो होम्योपैथिक दवाओं की मदद से उन्होंने इसका इलाज सिर्फ एक महीने में ही कर दिया.
उन्होंने बताया कि वहीं एक अन्य मामले में पैर में तीन प्रकार के चर्म रोग से पीड़ित ऊषा नाम की एक मरीज को बड़े- बड़े चर्म रोग विशेषज्ञ ठीक नहीं कर सके लेकिन जब उन्हें डॉ. वीएन शर्मा के पास लाया गया तो मात्र आठ महीनों में उन्हें सिर्फ होम्योपैथिक दवाओं से पूरी तरह ठीक कर दिया गया. इस दौरान उनके पैर से तीनों प्रकार के इंफेक्शन पूरी तरह खत्म हो गए.
गौरतलब है कि लोग अक्सर ही होम्योपैथिक दवाओं को सस्ता इलाज बोल कर इसे प्रथामिकता देने की बजाय एलोपैथिक दवाओं और डॉक्टरों की ओर भागते हैं. ऐसे में देखने को मिलता है कि हर जगह से उम्मीद छोड़ चुके मरीजों की परेशानी होम्योपैथी पर आकर रुक जाती है.
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