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Gyanvapi Masjid Case: काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, पूजा की अनुमति मांगने वाली हैं नई याचिकाएं

Gyanvapi Masjid Case: लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट में आज काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मस्ज़िद विवाद पर सुनवाई होने वाली है। ये सुनवाई दोपहर 2 बजे होगी। ये केस जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, सूर्य कांत और पी एस नरसिम्हा की विशेष बेंच के पास सुनवाई के लिए लगा है। सर्वोच्च अदालत आज मुख्य मामले के साथ-साथ मस्ज़िद परिसर में […]

Kashi Vishwanath-Gyanvapi Case
  • July 21, 2022 10:12 am Asia/KolkataIST, Updated 3 years ago

Gyanvapi Masjid Case:

लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट में आज काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मस्ज़िद विवाद पर सुनवाई होने वाली है। ये सुनवाई दोपहर 2 बजे होगी। ये केस जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, सूर्य कांत और पी एस नरसिम्हा की विशेष बेंच के पास सुनवाई के लिए लगा है। सर्वोच्च अदालत आज मुख्य मामले के साथ-साथ मस्ज़िद परिसर में मिले शिवलिंग की पूजा की अनुमति मांगने वाली नई याचिकाओं पर भी सुनवाई करेगा।

पूजा की अनुमति मांगने वाली हैं नई याचिकाएं

बता दें कि ज्ञानवापी परिसर के कोर्ट सर्वे के दौरान वहां पर मिले शिवलिंग और उसके पास मौजूद तहखाने में पूजा की अनुमति मांगने वाली तीन याचिकाएं देश की सबसे बड़ी अदालत में दाखिल हुई हैं। जिसमें एक याचिका 7 महिलाओं की है। जिनके नाम- अमिता सचदेव, लक्ष्मी देवी, सीता साहू, मंजू व्यास, रेखा पाठक, प्रियंका गोस्वामी और पारुल खेड़ा हैं।

व्यास परिवार की तरफ से याचिका

व्यास परिवार जो काशी विश्वनाथ मंदिर में सैकड़ों साल से पूजा करते आ रहे हैं उनके उसके सदस्य शैलेंद्र कुमार पाठक व्यास ने भी एक याचिका दाखिल की है। उन्होंने कहा है कि ज्ञानवापी मस्ज़िद के एक तहखाना का नियंत्रण उनके परिवार के पास था। जहां पर नियमित अंतराल पर पूजा होती थी। साल में 2 बार रामायण का पाठ भी होता था। लेकिन 5 दिसंबर 1992 के बाद से उन्हें वहां जाने से रोक दिया गया। शैलेंद्र की मांग है कि उन्हें वहां पूजा करने का अधिकार वापस मिलना चाहिए।

ये था सुप्रीम कोर्ट का पिछला आदेश

गौरतलब है कि इस मामले की आखिरी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 20 मई को हुई थी। उस दिन सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी केस वाराणसी के जिला जज को ट्रांसफर कर दिया था। जस्टिस चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने आदेश देते हुए कहा था कि मामले की जटिलता को देखते हुए इसे अधिक अनुभवी जज को भेजा जा रहा है। बेंच ने ये भी कहा था कि जिला जज मुस्लिम पक्ष के उस आवेदन को भी प्राथमिकता से सुनें, जिसमें हिंदू पक्ष के वाद को सुनवाई के अयोग्य कहा गया है।

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