नई दिल्ली. भगवान हनुमान की जाति को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ता ही जा रहा है. पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भगवान हनुमान एक दलित थे. इसके बाद भाजपा के कई नेताओं ने सामने आकर भगवान हनुमान को अलग-अलग जाति का बताया. पहले राजस्थान के अलवर में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भगवान हनुमान को दलित और वनवासी कहा. इसके बाद केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह ने भगवान हनुमान को आर्य बताते हुए कहा कि उस समय कोई और जाति नहीं थी. वहीं उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी ने भगवान हनुमान को जाट बताया. भाजपा के एमएलसी बुक्कल नबाव ने भगवान हनुमान को मुसलमान कहा.
इन सभी के बयानों पर कांग्रेस के सांसद और वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा में कहा, ‘हिंदू भगवान हनुमान पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और ऐसा करने वाले भाजपा के उन नेताओं के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अखाड़ा परिषद जैसे संगठनों को कोई भी संबंध नहीं रखना चाहिए. साथ ही इन सबी नेताओं का सार्वजनिक तौर पर तिरस्कार किया जाना चाहिए.’
उन्होंने इस बारे में नेताओं से सवाल करते हुए कहा, ‘हम हनुमानजी को भगवान शंकर का अवतार मानते हैं. लेकिन बीजेपी के नेता हनुमानजी को भी जाति-धर्म के मामले में घसीट रहे हैं. आखिर ये नेता किस धर्म का पालन कर रहे हैं?’ उन्होंने मांग उठाई और कहा, ‘उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के अन्य नेताओं को भगवान हनुमान पर किए अपने आपत्तिजनक बयानों पर माफी मांगनी चाहिए. साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद और अखाड़ा परिषद जैसे संगठनों को इन नेताओं का सार्वजनिक रूप से बहिष्कार और तिरस्कार करना चाहिए.’
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