नई दिल्ली: आज, 19 फरवरी 2025, को पूरे भारत में छत्रपति शिवाजी महाराज की 395वीं जयंती धूमधाम से मनाई जा रही है। शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 को पुणे जिले के शिवनेरी किले में हुआ था। उनके पिता का नाम शाहजी भोसले और माता का नाम जीजाबाई था। शिवाजी महाराज ने मराठा साम्राज्य की स्थापना की और अपने साहस, रणनीति और नेतृत्व के लिए प्रसिद्ध हुए। मराठा सम्राट छत्रपति शिवाजी महाराज भारतीय इतिहास के सबसे वीर और कुशल योद्धाओं में से एक हैं, जिनकी शौर्यगाथा इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। शिवाजी महाराज का नाम हर मराठा गर्व के साथ लेता है। वह केवल महाराष्ट्र ही नहीं, पूरे देश में वीरता की मिसाल हैं।
ऐसा कहा जाता है कि जीजाबाई ने उन्हें रामायण और महाभारत की कहानियां सुनाकर एक महान योद्धा बनने के लिए प्रेरित किया। माता जीजाबाई ने उन्हें बचपन से ही धर्म, नैतिकता और युद्ध कौशल की शिक्षा दी। 16 साल की उम्र में ही शिवाजी महाराज ने बीजापुर के तोरणा किले पर अपना कब्जा जमा लिया था। यह शिवाजी महाराज की पहली जीत थी, जिसने उनकी वीरता और दूरदर्शिता को साबित किया था। इसके बाद शिवाजी महाराज ने कई अन्य किलों को जीता और मराठा साम्राज्य की नींव रखी।
बता दें कि शिवाजी महाराज को औरंगजेब ने एक दिन आगरा आने का न्योता दिया और जब शिवाजी वहां पहुंचे तो औरंगजेब ने शिवाजी महाराज को धोखे से बंदी बना लिया। इसके बाद उन्हें आगरा के किले में कड़े पहरे में रखा गया। लेकिन शिवाजी ने बुद्धिमत्ता और चालाकी से खुद को बचाया। वे आगरा किले से बचकर सफलतापूर्वक महाराष्ट्र लौटे। छत्रपति शिवाजी महाराज ने स्वराज्य की अवधारणा को साकार किया और मुगलों, आदिलशाह और पुर्तगालियों से संघर्ष करते हुए एक स्वतंत्र मराठा साम्राज्य की स्थापना की। 6 जून 1674 को रायगढ़ किले में भव्य समारोह में उनका राज्याभिषेक हुआ। वे आधिकारिक रूप से “छत्रपति” बने और अपने शासन को हिंदवी स्वराज का नाम दिया।
बीजापुर के सुल्तान ने शिवाजी महाराज को हराने के लिए अफजल खान नामक एक क्रूर सेनापति को भेजा था। उसने शिवाजी को धोखे से मारने का प्लान बनाया। इसके लिए अफजल खान ने उन्हें मिलने के लिए बुलाया, लेकिन शिवाजी महाराज ने पहले ही उसकी चाल को भांप लिया था। जब अफजल खान ने शिवाजी को गले लगाने के बहाने उन पर हमला करने की कोशिश की तो उन्होंने अपने नाखून जैसे हथियार से उससे मार डाला।
Also Read…