नई दिल्लीः मस्जिद बनाम मंदिर के क्रम में संभल के बाद अब अजमेर दरगाह पर विवाद बढ़ रहा है। राजस्थान की अजमेर शरीफ दरगाह को शिव मंदिर बताने वाली हिंदू सेना की याचिका को निचली अदालत ने मंजूर कर लिया है। मामले में तीन पक्षकारों को नोटिस जारी कर 20 दिसंबर को सुनवाई की तारीख तय की गई है। वहीं, अब अखिल भारतीय सूफी सज्जादानशीन परिषद के अध्यक्ष सैयद नसरुद्दीन चिश्ती का भी बयान आया है।
मीडिया से बात करते हुए सैयद नसरुद्दीन चिश्ती ने कहा, “संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए गए हैं, एक दरगाह कमेटी, एएसआई और तीसरा अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय। मैं ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का वंशज हूं, लेकिन मुझे इसमें पक्ष नहीं बनाया गया है। हम अपनी कानूनी टीम के संपर्क में हैं।”
सैयद नसरुद्दीन चिश्ती ने कहा, “आज भारत एक वैश्विक शक्ति बनने जा रहा है। हम कब तक मंदिर-मस्जिद विवाद में उलझे रहेंगे? क्या हम आने वाली पीढ़ी के लिए मंदिर-मस्जिद विवाद को छोड़ कर जाएंगे? उन्होंने आगे कहा, “अजमेर शरीफ दरगाह से भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के हिंदू-मुस्लिम-सिख और ईसाई जुड़े हुए हैं। इस दरगाह से सभी की आस्था जुड़ी हुई है। इसका इतिहास 850 साल पुराना है। ख्वाजा मोइनुद्दीन औलाद-ए-अली हैं और 1195 में भारत आए थे। यह दरगाह 1236 से यहां स्थापित है। इन 850 सालों में सभी धर्मों के राजा-महाराजा, ब्रिटिश शासन के लोग, सभी इस दरगाह पर आए और आस्था रखते थे। यह दरगाह हमेशा प्रेम और शांति का संदेश देती है। इस जगह के बारे में ऐसे बुरे विचार रखना दुनिया के करोड़ों-अरबों लोगों की आस्था का अपमान है।
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