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दिल्ली में जिसके पास है 4 चक्का वाली कार, हो जाओ सावधान! नई CM बोलने वाली हैं हल्ला, अब नहीं घुटेगा दम!

सीएजी रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि दिल्ली में प्रदूषण जांच केंद्र (PCC) मनमाने तरीके से पॉल्यूशन सर्टिफिकेट जारी कर रहे थे, जिससे प्रदूषण जांच की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं.

Delhi CM
inkhbar News
  • April 1, 2025 4:56 pm Asia/KolkataIST, Updated 3 days ago

नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण हर साल गंभीर समस्या बनकर उभरता है। हाल ही में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट ने इस संकट की असली वजहों का खुलासा किया है। रिपोर्ट में प्रदूषण जांच प्रणाली में गंभीर खामियों की ओर इशारा किया गया है, जिससे प्रमाणन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए हैं।

प्रदूषण जांच केंद्रों की अनियमितता

रिपोर्ट में बताया गया कि दिल्ली के प्रदूषण जांच केंद्र (PCC) मनमाने तरीके से पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) प्रमाणपत्र जारी कर रहे हैं। कई ऐसे वाहन, जो उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते थे, उन्हें भी प्रमाण पत्र दे दिया गया। यह स्थिति न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के प्रयासों को कमजोर करती है।

डेटाबेस से नहीं जुड़ रहे थे उत्सर्जन आंकड़े

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद, उत्सर्जन डेटा और वाहनों के राष्ट्रीय डेटाबेस (VAHAN) के बीच कोई लिंक स्थापित नहीं किया गया। इससे प्रदूषण जांच केंद्रों को वाहन के बीएस (BS) उत्सर्जन मानकों को मैन्युअल रूप से चुनने की छूट मिली, जिससे गड़बड़ी की संभावना बढ़ गई। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में पंजीकृत वाहनों की संख्या और किए गए PUC परीक्षणों के बीच भारी अंतर पाया गया। यह दर्शाता है कि वाहन मालिक नियमित रूप से अपने वाहनों की प्रदूषण जांच नहीं करवा रहे हैं।

परीक्षण उपकरणों की जाँच नहीं

परिवहन विभाग (DoT) ने PUC उपकरणों की जाँच और प्रदूषण जांच केंद्रों की दक्षता को सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की। कई ऐसे केंद्र पाए गए जो प्रमाणपत्र जारी कर रहे थे, जबकि उनके उपकरणों की जांच ही नहीं हुई थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि दिल्ली में पुराने डीजल वाहनों पर नियंत्रण के उपाय नहीं किए गए। सुप्रीम कोर्ट के प्रतिबंध के बावजूद पुराने वाहनों का पंजीकरण जारी रहा और जब्ती की कार्रवाई सुस्त रही। 2018-21 के बीच सिर्फ 6.27% पुराने वाहनों को ही डीरजिस्टर किया गया।

एनसीआर से आने वाले वाहनों की निगरानी नहीं

दिल्ली में प्रवेश करने वाले वाहनों की उत्सर्जन निगरानी बेहद कमजोर रही। 128 एंट्री पॉइंट्स में से केवल 7 पर ही जांच दल तैनात किए गए थे। प्रवर्तन शाखा के पास 1,134 कर्मियों की जरूरत थी, लेकिन केवल 292 कर्मचारी तैनात किए गए। सीएजी की रिपोर्ट में सरकार को प्रदूषण जांच की विश्वसनीयता बढ़ाने, स्वचालित परीक्षणों को बढ़ावा देने और पुराने वाहनों पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की सिफारिश की गई है। यदि इन सिफारिशों पर अमल नहीं किया गया तो दिल्ली की हवा और ज्यादा जहरीली हो सकती है।

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