नई दिल्ली : प्रेमानंद जी महाराज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। वृंदावन के प्रसिद्ध संत से मिलने देश-विदेश से लोग आते हैं। वह इन दिनों सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय हैं। वह अपने सत्संग के जरिए लोगों को सांसारिक और आध्यात्मिक जीवन का ज्ञान देते हैं। अक्सर सत्संग के बाद भक्त प्रेमानंद महाराज से तमाम तरह की समस्याओं को लेकर सवाल पूछते हैं, जिसका संत बड़ी ही सहजता से जवाब देते हैं। इसी बीच एक भक्त ने उनसे कलियुग के बारे में सवाल किया। इस पर प्रेमानंद महाराज ने ऐसा जवाब दिया कि सुनकर हर कोई हैरान रह गया। अब उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
जब प्रेमानंद महाराज से पूछा गया कि महाराज जी कलियुग कैसा होगा? कैसे लोग होंगे? संत का जवाब सुनकर सभी हैरान रह गए। दरअसल प्रेमानंद महाराज ने कहा कि श्री सुखदेव जी कहते हैं कि परीक्षित काल बहुत शक्तिशाली है, कलियुग में वही महान माना जाएगा जिसके पास धन होगा। लोग उसे बड़ा आदमी मानेंगे। इतना ही नहीं, वह व्यक्ति कुलीन, गुणवान और सदाचारी माना जाएगा। वही महान माना जाएगा, जिसके पास धन होगा, जिसके पास शक्ति होगी, देखिए ऐसा ही हो रहा है।
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उन्होंने आगे कहा कि पहले लड़की की कुंडली देखी जाती थी, लड़के की कुंडली देखी जाती थी. गुण मिलान किया जाता था. लेकिन, कलियुग में ये सब नहीं चलेगा. शादी के लिए परिवार के चरित्र की जांच नहीं होगी. लड़का-लड़की एक दूसरे को पसंद करेंगे, बस. अगर एक दूसरे को पसंद करेंगे तो ठीक, नहीं तो किसी और से शादी कर लेंगे. ये बहुत गंदा है. उन्होंने ये भी कहा कि इस तरह का गंदा व्यवहार होगा. लड़का-लड़की अपनी रुचि के आधार पर ही शादी करेंगे. गुण, कुंडली का इससे कोई लेना-देना नहीं होगा. परिवार का इससे कोई लेना-देना नहीं होगा.
संत बोले, “क्या तुम जानते हो कि व्यवहार में कौन कुशल माना जाएगा? नहीं, है न? तो मैं तुम्हें बता दूँ, जो व्यक्ति जितना झूठ और बेईमानी करेगा, जितना बुरा व्यवहार करेगा, वह उतना ही व्यवहार में कुशल माना जाएगा। कहा जाएगा, देखो कितना कुशल है। जो दूसरों से लाखों की ठगी करता है, उसे कलियुग में कुशल माना जाएगा।”
महाराज जी ने आगे कहा, किसी के जीवन में सच्चाई और ईमानदारी नहीं होगी। युग धर्म का प्रभाव यह है कि जो व्यक्ति जितना अधिक धोखेबाज और चालाक होगा, वह उतना ही अधिक कुशल माना जाएगा। वह जितना अधिक छल-कपट करेगा, वह उतना ही अधिक व्यवहार कुशल होगा। किसी पुरुष और स्त्री की श्रेष्ठता उसके सद्गुण और संयम से नहीं, उसके चरित्र से नहीं, बल्कि उसकी दुष्टता से होगी। उसका स्वभाव जितना अधिक दुष्ट होगा, वह जितना अधिक नीच होगा, कलियुग में वह उतना ही अधिक महान होगा।
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