नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ बढ़ाने के फैसले (ट्रंप टैरिफ वॉर) के बाद दुनिया भर के बाजारों में दबाव बढ़ गया। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखा. यूनियन बजट 2025 के बाद आज शेयर बाजार खुलते ही धड़ाम हो गया. हफ्ते के पहले कारोबारी दिन दोनों बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी भारी गिरावट के साथ खुले. प्री-ओपनिंग सेशन में सेंसेक्स 440 अंक (0.57%) गिरकर 77,060 पर जबकि निफ्टी भी 162.80 अंक (0.69%) गिरकर 23,320 पर कारोबार कर रहा था.
बाजार खुलते ही बिकवाली हावी हो गई. सेंसेक्स 710.70 अंक (0.92%) गिरकर 76,795.26 पर, जबकि निफ्टी 211.75 अंक (0.90%) गिरकर 23,270.40 पर कारोबार कर रहा था. शुरुआती कारोबार में बड़ी कंपनियों के शेयरों पर दबाव रहा और बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर में गिरावट दर्ज की गई. शेयर बाजार में बड़े शेयरों (लार्जकैप) के मुकाबले छोटे और मझोले शेयरों (मिडकैप और स्मॉलकैप) में जोरदार बिकवाली देखने को मिल रही है. निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 282 अंक गिरकर 53,204 पर, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 128 अंक गिरकर 16,843 पर आ गया.
डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर के संकेतों से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है. अगर अमेरिका अपने आयात शुल्क में बड़ा बदलाव करता है तो इसका असर भारतीय कंपनियों और निर्यातकों पर भी पड़ सकता है. इस आशंका के चलते विदेशी निवेशकों ने बिकवाली तेज कर दी, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया. इस खबर के बाद निवेशकों में घबराहट देखी जा रही है.
लार्जकैप शेयरों में एलएंडटी, एनटीपीसी, पावरग्रिड, टाटा स्टील, टाटा मोटर्स और रिलायंस सबसे ज्यादा गिरे. मिडकैप शेयरों में हिंदुस्तान पेट्रोलियम, सेल और बीएचईएल में भारी गिरावट देखी गई. स्मॉलकैप शेयरों में बीडीएल और जेडब्ल्यूएल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ. कुल मिलाकर बाजार में निवेशकों को भारी नुकसान हुआ.
शेयर बाजार के जानकारों का कहना है कि वैश्विक बाजार का असर अभी जारी रह सकता है. निवेशकों को जल्दबाजी में बिकवाली नहीं करनी चाहिए. बाजार में अस्थिरता रहेगी, लेकिन लंबी अवधि में सुधार की संभावना है. निवेशकों को बाजार की चाल पर नजर रखनी चाहिए और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में निवेश करना चाहिए.
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