नई दिल्ली: बोफा सिक्योरिटीज की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार भारत में थर्मल कोयला एक बार फिर विद्युत उत्पादन का सबसे बड़ा विकल्प बना है. मजबूत आर्थिक विकास के चलते देश का कोयला आधारित बिजली उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है, जो अन्य ऊर्जा स्रोतों को पीछे छोड़ रहा है।
घरेलू उत्पादन बढ़ा
भारत में कोयला उत्पादन का स्तर काफी ज्यादा है। इससे विदेशी बाजारों से आयात की जरूरत कम हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, आयात की कम आवश्यकता के कारण वैश्विक समुद्री कोयले की कीमतों को भी सीमित समर्थन मिला है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में कोयला आधारित बिजली उत्पादन बेहद मजबूत था। 2025 में इसके नए रिकॉर्ड तक पहुंचने की संभावना है। इसके अलावा, वियतनाम सहित अन्य विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में भी थर्मल कोयले की मांग बढ़ रही है। जिससे अगले 18 महीनों तक यह प्रवृत्ति जारी रहने की उम्मीद है।
वैश्विक कीमतों में गिरावट
चीन में थर्मल कोयले का भंडार बढ़ा है जिसके कारण नवंबर के अंत से कोयले के वैश्विक कीमतों में गिरावट देखी गई है। रिपोर्ट बताती है कि नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की प्रतिस्पर्धा के चलते चीन में कोयले की मांग घट रही है जिससे आयात की जरूरत भी कम हो रही है।
तटीय इलाकों में बढ़ेगी कोयले की मांग
बोफा सिक्योरिटीज का मानना है कि भारत के तटीय क्षेत्रों में निर्माणाधीन बिजली संयंत्रों के कारण आने वाले दो वर्षों में कोयले की समुद्री मांग में वृद्धि हो सकती है। हालांकि, मांग वाले समय की ओर बढ़ते हुए निकट भविष्य में कीमतों में और गिरावट का जोखिम है। कुल मिलाकर, कोयले की घटती कीमतें और मजबूत घरेलू उत्पादन भारत में ऊर्जा क्षेत्र के लिए राहत भरी खबर हो सकती है। जबकि वैश्विक बाजारों में कीमतों का उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।
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