नई दिल्ली: अप्रैल महीने की शुरुआत होते ही भारत देश में कई वित्तीय नियमों में बदलाव होने जा रहा है। इसका असर न सिर्फ आम नागरिक की आय पर पड़ेगा, बल्कि इन बदलावों का प्रभाव टैक्सपेयर्स, डिजिटल ट्रांसफर और जीएसटी समेत कई चीजों पर भी होगा। आइए जानते हैं उन बदलावों के बारे में:
मोदी सरकार ने मध्यम वर्ग को राहत देते हुए 12 लाख रुपये तक की आय को कर मुक्त कर दिया है। लेकिन यह सुविधा सिर्फ नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) चुनने वालों को मिलेगी। वहीं बेसिक टैक्स छूट की सीमा भी 3 लाख से बढ़ाकर 4 लाख रुपये कर दी गई है। इसके अलावा वेतनभोगी कर्मचारियों को 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलेगा, जिससे 12.75 लाख रुपये तक की सैलरी पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने यूपीआई पेमेंट्स को और सुरक्षित बनाने के लिए नया नियम लागू किया है। अगर आपका यूपीआई से लिंक मोबाइल नंबर लंबे समय से इनएक्टिव है, तो उससे पेमेंट नहीं हो सकेगा। बता दें, गूगल पे, फोनपे जैसे ऐप्स पर यह नियम लागू होगा।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और ऐक्सिस बैंक ने अपने कुछ क्रेडिट कार्ड्स की रिवॉर्ड पॉलिसी में बदलाव किया है। एसबीआई सिंप्लीक्लिक और एयर इंडिया एसबीआई प्लैटिनम कार्ड्स पर नया रिवॉर्ड स्ट्रक्चर लागू हुआ है। वहीं, Axis Bank के विस्तारा कार्ड्स पर बदलाव एयर इंडिया के मर्जर होने के बाद लागू होंगे।
पुरानी पेंशन योजना (OPS) की जगह यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) आज से लागू हो गई है। अब 25 साल या उससे अधिक सेवा वाले केंद्रीय कर्मचारियों को अंतिम 12 महीनों की औसत बेसिक सैलरी का 50% पेंशन के रूप में मिलेगा। इस योजना के दायरे में 23 लाख केंद्रीय कर्मचारी आएंगे।
अब गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) पोर्टल पर मल्टी फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा, E-Way Bill सिर्फ उन्हीं दस्तावेजों पर बनेगा, जो 180 दिनों से पुराने न हों। यह नियम बिजनेस सेक्टर के लिए बेहद अहम है।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नैशनल बैंक और केनरा बैंक ने मिनिमम बैलेंस की सीमा बदल दी है। अगर खाते में तय सीमा से कम बैलेंस होगा, तो ग्राहकों को जुर्माना देना पड़ेगा। खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों के खाताधारकों पर इस बदलाव का अधिक असर पड़ सकता है।
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