Husband Built His Wife’s Temple: बिहार के मोतिहारी जिले में एक अनोखी प्रेम कहानी ने सबका ध्यान खींचा है. यहां के मधुचाई गांव में रहने वाले रिटायर्ड पंचायत सचिव बालकिशुन राम ने अपनी पत्नी शारदा देवी की याद में एक भव्य मंदिर बनवाकर अपने अटूट प्रेम को अमर कर दिया. छह साल पहले पत्नी के निधन के बाद उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति से मिली राशि से यह अनूठा स्मारक बनवाया. जिस पर 60 लाख रुपये की लागत आई. यह मंदिर न केवल उनकी प्रेम कहानी का प्रतीक है बल्कि पति-पत्नी के सात जन्मों के बंधन को भी एक नई मिसाल देता है.
प्रेम की अमर निशानी
‘प्यार हमारा अमर रहेगा, याद करेगा जहान, तू मुमताज है मेरे ख्वाबों की, मैं तेरा शाहजहां’ – फिल्म ‘मुद्दत’ का यह गाना प्रेम की अनंतता का प्रतीक रहा है. ताजमहल की तरह ही बालकिशुन ने अपनी पत्नी के लिए एक ऐसा स्मारक बनवाया. जो प्रेम और समर्पण की जीवंत गाथा बयां करता है. आज के दौर में जब छोटी-छोटी बातों पर रिश्ते टूट जाते हैं और तलाक आम हो चुका है. यह कहानी एक मिसाल पेश करती है. जहां लोग गुस्से में हिंसा तक का सहारा ले लेते हैं. वहीं बालकिशुन ने अपने दुख को बदला और पत्नी की यादों को संजोया.
शारदा के लिए बना मंदिर
शारदा देवी का निधन छह साल पहले हार्ट अटैक से हुआ था. इस घटना ने बालकिशुन को गहरे दुख और अकेलेपन में डुबो दिया. पत्नी की अनुपस्थिति को सहने के लिए उन्होंने अपनी रिटायरमेंट की राशि लगभग 60 लाख रुपये. इस मंदिर के निर्माण में लगा दिए. तीन साल की मेहनत के बाद यह भव्य मंदिर तैयार हुआ. जिसमें शारदा देवी की एक सुंदर मूर्ति स्थापित की गई है. यह मंदिर सिर्फ एक इमारत नहीं बल्कि उनके अटूट प्रेम और समर्पण का जीता-जागता प्रमाण है.
पर्यटन मंत्री ने की तारीफ
मंदिर का उद्घाटन बिहार के पर्यटन मंत्री राजू कुमार सिंह ने किया. इस अवसर पर उन्होंने कहा ‘यह काम आज के युग में साधारण नहीं बल्कि असाधारण और प्रेरणादायक है. पति-पत्नी का रिश्ता वही समझ सकता है जिसका दिल सच्चा हो. बालकिशुन ने अपनी पत्नी की याद को इस मंदिर के जरिए अमर कर दिया.’ उद्घाटन समारोह में मौजूद लोगों ने भी इस अनोखे प्रयास की जमकर सराहना की.
एक प्रेरणादायक कहानी
आधुनिक समाज में जहां रिश्तों की नींव कमजोर पड़ती जा रही है. बालकिशुन की यह पहल प्यार और विश्वास की ताकत को दर्शाती है. मंदिर में शारदा देवी की मूर्ति न सिर्फ उनकी स्मृति को जीवित रखती है बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक संदेश देती है कि सच्चा प्यार कभी खत्म नहीं होता. यह मंदिर अब न केवल स्थानीय लोगों के लिए बल्कि पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन सकता है.
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