जम्मू कश्मीर: चरार-ए-शरीफ़ सीट पर नेशनल कॉन्फ्रेंस की होगी वापसी या पीपुल्स डेमोक्रेटिक फिर मारेगी बाजी,जानें चुनावी इतिहास

जम्मू कश्मीर: चरार-ए-शरीफ़ सीट पर नेशनल कॉन्फ्रेंस की होगी वापसी या पीपुल्स डेमोक्रेटिक फिर मारेगी बाजी,जानें चुनावी इतिहास Jammu and Kashmir: National Conference will return to Charar-e-Sharif seat or People's Democratic will win again, know the election history.

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जम्मू कश्मीर: चरार-ए-शरीफ़ सीट पर नेशनल कॉन्फ्रेंस की होगी वापसी या पीपुल्स डेमोक्रेटिक फिर मारेगी बाजी,जानें चुनावी इतिहास

Shikha Pandey

  • September 14, 2024 2:43 pm Asia/KolkataIST, Updated 2 months ago

नई दिल्ली : जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव का शंखनाद हो चुका है. जम्मू कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव होंगे.चुनाव के तारीखों का ऐलान चुनाव आयोग ने कर दिया है. चुनाव की प्रक्रिया 20 अगस्त से शुरु होगी और 8 अक्तूबर को खत्म होगी.करीब डेढ़ महीने तक तीन चरणों में चुनाव होगे. आज हम आपको चरार-ए-शरीफ़ विधानसभा सीट के बारे में बताने जा रहे हैं .यह बडगाम जिले के तहत आता है.यह समान्य श्रेणी की विधानसभा सीट है. 2014 के विधानसभा चुनाव में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के गुलाम नबी लोन ने जम्मू और कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अब्दुल रहीम राथर को 5167 वोटों के अंतर से हराकर सीट जीती थी. पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी . गुलाम नबी लोन को फिर से चुनावी मैदान में उतारा है.वहीं जम्मू और कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अब्दुल रहीम राथर को टिकट दिया है. बीजेपी ने इस सीट पर जाहिद हुसैन जान पर दांव लगाया है. का परिणाम किस पार्टी के पक्ष में होगा यह अब जनता को तय करना है. चरार-ए-शरीफ़ सीट का परिणाम किस पार्टी के पक्ष में होगा यह अब जनता को तय करना है.

राजनीतिक इतिहास

चरार-ए-शरीफ़ विधानसभा सीट पर अभी तक दस बार चुनाव हुए हैं. 1962 के पहले विधानसभा चुनाव में जम्मू-कश्मीर के अब्दुल रशीद बख्शी ने चुनाव जीता था. 1967 से लेकर 1972 तक इस सीट पर कांग्रेस के अब्दुल कयूम का कब्जा था.1977 से लेकर 2008 तक इस सीट पर लगातार नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जीत हासिल की थी. 2014 के चुनाव में इस सीट पर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के गुलाम नबी लोन ने जीत दर्ज की थी. चरार-ए-शरीफ़ सीट पर नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी मुख्य दल हैं. इस सीट पर अभी तक बीजेपी और कांग्रेस का खाता नहीं खुला है.

आर्टिकल 370 निरस्त होने के बाद पहली बार चुनाव

 

बता दें जम्मू कश्मीर में साल 2018 निर्वाचित सरकार नहीं है. 2018 से पहले पीडीपी-बीजेपी गठबंधन सराकर राज्य में थी. महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली सरकार से बीजेपी ने समर्थन वापस ले लिया था. जिसके बाद से जम्मू कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू किया गया और तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने विधानसभा को भंग कर दिया था. वहीं 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 को निरस्त कर दिया गया था.इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया गया.दस साल बाद जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव होने जा रहा हैं.

2014 चुनाव परिणाम

2014 के विधानसभा चुनाव में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के गुलाम नबी लोन ने जीत हासिल की थी.उन्हें 32,849 वोट मिले थे. वहीं दूसरे नबंर पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अब्दुल रहीम राथर थे.उन्हें 27,682 वोट मिले थे. तीसरे नबंर पर कांग्रेस के जाहिद हुसैन थे.उन्हें 922 वोट मिले थे.

 

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